ये नहीं ठीक रास्ता मेरा,
वो नहीं ठीक मंजिल मेरी
ये नहीं सही मेरी खातिर
वो सही नहीं सब जग जाहिर
क्या हुआ, हुआ जो गलत सही
मैं , मैं ही हूँ सरकार नही
क्या हुआ कभी न फलित हुआ
मैं अभिलाषा से छलित हुआ
सब रिश्ते नाते तोड़ ताड़
सब सुख सुविधाएं छोड़ छाड़
मुझको उसमें मिल जाना है
कल लौट के घर को जाना है।