मौत सामने है ,
क्या खूब नज़ारा है!
इन खुश्क से होंठों में ,
एक नाम तुम्हारा है
एक आस तुम्हारी है,
एक प्यास तुम्हारी है
तुम्हे एक नज़र देखूं
अरमान खुदारा है ,
यह पीर का मंजर है,
या रूह ही पीर सी है,
या पीर को मेरी कुछ
तेरा भी इशारा है
न दर्द हुआ ऐसा
ना ज़ख्म मिले ऐसे
यह शज़र था शजरे में
पर ना ये हुआ मुमकिन
हम भूल सकें तुमको
तुम्हे दिल ने बसाया है
साँसों ने संवारा है
मेरे सांवरे सामने हैं
क्या खूब नज़ारा है 💜
No comments:
Post a Comment