ऐसे लगा है आँख में काजल लगे कि धूप को ढक ढक रहा कोई शलमला बादल कि ऐसे आँख में डूबी हुई है सारी मदहोशी के जैसे बांटती फिरती हवा है सबको बेहोशी के जैसे सूरमे ने ली कसम के क़त्ल कर देगा देख लेगा जो भी वो नैनों को शर कर देगा
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