Saturday, November 26, 2016

पंथ कुछ और काज।

कोई इंसान कभी भी अपने समाज के अंदर के सो कॉल्ड डेविल का दर्द नहीं जान पाता,
क्योंकि कहानी भगवान लिखता है।
वो दर्द जनता को जानने ही नहीं दिया जाता जिसकी वजह से बना है वो क्रूर, हठी, तानाशाह, निर्दयी
जो कोसता रहता है उसे अंदर ही अंदर
कभी उसके पीछे कोई पारिवारिक समस्या रहती है
जो सिर्फ इस वजह से आप तक नहीं आती
क्योंकि आप जैसे बहुत से लोगों को सिर्फ "इट्स ओके यार, सबके साथ होता है" कहने की आदत है
कोई समझना नहीं चाहता की हर समंदर की अलग गहराई है और आप सबको एक ही मापक से नहीं माप सकते
आप समझने की कोशिश ही न करेंगे इसीलिए वो लील जाता है उन तमाम सामाजिक प्रताणनाओं को,
उसके जीवन का गरल समाज में कैंसर बन जाता है
और फिर शुरू होती है उन सबकी अनभिज्ञता की दास्तां
जिन्होंने उसको दादू से दावूद तक के सफर की मम्मी सिस्टर की है
और अंत तक कोई ये नहीं समझ पाता की वही शैतान जिसने नाटक लिखा है,
रंगमंच पर हर पात्र को गरिया रहा है।
कभी उसके पीछे होता है कोई अधूरा सपना, कुछ अधूरी ख्वाहिशें, कुछ टूटे रिश्ते, कुछ छूटे अपने
और ये बात भी कुछ अलग नहीं है ऐसा तोह सबके साथ होता है!
अरे! सबके साथ होता है और सब चुपचाप मरवाते रहते हैं इसका मतलब ये तो नहीं की वो भी मरवाए!
वो रखता है हिम्मत तमाम ओड्स में से एक इवन बनने की
तमाम रोड़ो में से आगे निकलने की
आप लोग क्यों सपोर्ट नहीं कर सकते यार?
क्योंकि "टाइम टू एक्ट" वाला शॉर्टकट समझ नहीं आता,
सबको लगता है कि "वक़्त सारे घाव भर देगा"
घंटा भर देगा ,
वक़्त से खुद जाके पूछा है कभी कितने घाव लिए फिरता है?
वो मम्मी के हाथ का कढ़ी भात, जिसके लिए सालों से जीभ लपलपा रही है, वक़्त ला के देगा?
वक़्त वो वक़्त लौटा देगा जो गुजारी है उसने बिना पुस्तकों के सिलेबस तैयार करते हुए!
वक़्त वो ठंडी की रातें लौटाने आएगा जिनमें पुरे कोड़े पहनने के बाद भी इतना दम नहीं रहता था कि शरीर की थरथराहट काम हो सके!
वक़्त वो एक समोसे और ढेर सारी चटनी के सहारे गुजारा गया दौर फिर से सही करने का मौका देगा!
अगर हर बार मन "नहीं" कह के रुक जा रहा है तो प्लीज अब आगे से किसी से मत बोलना की टाइम सब ठीक कर देता है,
टाइम सब ठीक करने की औकात ही नहीं रखता,
अगर उसके पास कुछ है तो इतना के आपको realize करा सकता है कि क्या करना है,
कब करना है ,
और कैसे करना है।
वो खुद को दूसरा घाव देने से बचने के लिए ऐसा हो गया है।
न की ऐसा था, ऐसा ही था, और ऐसा ही रहेगा।
क्योंकि उसे पता है
There's a light in the other side of the door,
So he does what is right, instead of doing what is easy.
He knows "after all patience, there's a way to get what you want"

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